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दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण मंत्र साधना

28/07/2017 - वशीकरण यन्त्र
दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण मंत्र साधना

दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण मंत्र साधना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय विष्णु भगवान के अवतार थे | उनके पिता का नाम ऋषि अत्रि और माता का नाम अनसुया देवी था | कहीं-कहीं यह भी उल्लेखित है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का सम्मिलित रूप है भगवान दत्तात्रेय | मान्यताओं के अनुसार इनकी साधना अति सफल होती है और अटूट विश्वास है कि साधना का फल तुरंत मिलता है | अगर सच्चे मन से इनकी आराधना की जाए तो ये निश्चित तौर पर प्रसन्न हो हैं और सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं | ये महायोगी के रूप में भी पूजे जाते हैं | आज इस लेख में त्तात्रेय तंत्र साधना प्रयोग के बारे में बताया जा रहा है जिसके प्रयोग से आपको भी मनवांछित फल की प्राप्ति होगी | इस साधना को करने से व्यक्ति अपने अंदर सुरक्षा कवच को महसूस करने लगता है | वह इन प्रयोगों द्वारा किसी को भी अपने वश में भी कर सकता है | तो चलिए आप भी अपनाए दत्तात्रेय तंत्र साधना प्रयोग |

दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण मंत्र साधना

दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण मंत्र साधना

दत्तात्रेय वशीकरण मंत्र साधना

१) ”ओम् श्रीं ह्वीं क्लीं ग्लौं द्राम दत्तात्रेयाय नमः”… आप एक  पीला पीले रंग के आसन को बिछाकर उस पर बैठ जाएं पीले रंग के कपड़े को पहन कर किसी भी बुधवार की रात को | अपना मुख उत्तर दिशा की तरफ रखें | फिर अपने सामने लकड़ी के एक छोटे से पाटे पर पीले रंग का कपड़ा बिछा दे तथा उस पर दत्तात्रेय यंत्र स्थापित करें | आप उस पर सिंदूर चढ़ाए | साथ ही साथ दीपक जलाएं घी का और रुद्राक्ष की माला लेकर ११ माला का जप करें उपरोक्त मंत्र का | जप समाप्त होने के बाद सिंदूर को संभालकर एक छोटी सी चांदी की डिब्बी में रख दें | अब जब भी आपको इसका प्रयोग करना हो तब उपरोक्त मंत्र का जाप करें सिर्फ ११ बार और तिलक लगा ले उसी सिंदूर से | अब आप जिस व्यक्ति के पास जाएंगे वह आप से वशीभूत हो जाएगा |

२) ” तुलसी-बीजचूर्ण तू सहदेव्य रसेन सह | रवौ यस्तिलकं कुर्यान्मोहयेत् सकलम् जगत्”.. इस जाप को आरंभ करने के पहले सहदेवी के रस में तुलसी के बीजों का को मिला ले | अब इसे पीस कर पेस्ट बना ले | अब इस पेस्ट से तिलक कर ले अपने मस्तिष्क पर | अब आप जिस इंसान को देखेंगे वह आपके वश में हो जाएगा |

३) “अनामिकाय रक्तेन लिखेन्मंत्र च भूर्जके, यस्य नाम लिखन्मध्ये मधुमध्ये च निक्षिपेत् | तेन स्यादाकर्षणं च सिद्धयोग उदाह्रत:, यस्मै कस्मै न दातव्यम नान्यथा मम भषितम |” .. भोजपत्र के ऊपर उपरोक्त मंत्र को लिखे अपनी अनामिका उंगली के खून से | अब भोजपत्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखे जिसे आप वश में करना चाहते हैं और इसे शहद की डिबिया में डूबो कर रख दें | अब १०८  बार जप करें इस मंत्र का | वह व्यक्ति आपके वश में हो जाएगा |

४ ) श्रंगि-चंदन-संयुक्तो वचा-कुष्ठ समन्वित:| धूपौ गेहे तथा वस्त्रे मुखे चैव विशैषत: | राजा प्रजा पशु-पक्षी दर्शनान्मोहकारक:| गृहीत्वा मूलमाम्बूलं तिलकं लोकमोहनम”.. यह मंत्र भी वशीकरण प्रभाव उत्पन्न करता है | इस मंत्र का जाप करें | चंदन, कुष्ठ, काकड़ा सिंगी, वच को मिलाकर पीस लें और पाउडर बना लें | अब इससे धूप बनाएं तथा उसे अपने वस्त्रों तथा शरीर पर दें | इसके पाउडर से तिलक लगाएं | इस क्रिया को करने से आपका वशीकरण प्रभाव पढ़ेगा |

६) तांबूल की जड़ को पीसकर पाउडर बना ले या पेस्ट बना लें | अब इससे किया हुआ तिलक भी आपके वशीकरण प्रभाव को बढ़ाएगा |

दत्तात्रेय साधना के अन्य मंत्र

१) “ ओम् द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा”

२) ” ओम् दिगंबराय विघ्हे योगेश्रारय् धीमही तन्नो दत्त प्रचोदयात |”

३) ओम् द्रां दत्तात्रेय नमः|”

४)”जटाधारम पांडुरंग शूलहस्तं कृपानिधिम, सर्व रोग हरं देव, दत्तत्रेयमहं भज | “

५) ”ओम् अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषि: अनुष्टुप छंद, श्री दत्ता परमात्मा देवता, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनियोग |”

ऊपर दिए गए किसी भी मंत्र की साधना करने के लिए आप सबसे पहले पानी से भरे हुए एक बर्तन को एक बर्तन में रखे अपने आसन के पास | अब लाल कपड़े के ऊपर विग्रह बना ले दत्तात्रेय जी का | इसके बाद चावल के कुछ दाने और फूल को अपने बांय हाथ में लेकर साधना आरंभ करें उपरोक्त मंत्रों में से किसी भी मन्त्र के द्वारा |

दत्तात्रेय शाबर मंत्र

१) “ओम नमः परमब्रह्म परमात्मने नमः उत्पत्तिस्थिति प्रलायंकराये, ब्रह्म हरिहराये त्रिगुणात्मने सर्व कौतुकानी दर्शया दर्शय दत्तात्रेय नमः| मनोकामना सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ||”

उपरोक्त शाबर मंत्र दत्तात्रेय सहित ब्रह्मा और विष्णु को समर्पित है | इस मंत्र का प्रतिदिन जाप करें १०८ बार | इससे मनोवांछित सिद्धि की प्राप्ति होती है | यह मन्त्र व्यक्ति  की कार्यक्षमता तथा आत्मविश्वास बढ़ता है | इस मंत्र को अति गोपनियता को रखते हुए जाप करना चाहिए |

दत्तात्रेय कवच/तंत्र

इस कवच का मंत्र है – “ॐ द्रां द्रां वज्र कवचाये हुं ||” .. इस मंत्र की साधना एक प्रकार से तांत्रिक साधना होती है | इसे विधि विधान के साथ करने से जो शक्ति प्राप्त होती है वह अदभुत होती है | इस दत्तात्रेय सुरक्षा कवच के द्वारा व्यक्ति के अंदर से किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका दूर होती है | यहां तक कि कोई भी भय या उसके मन में कोई परेशानी हो तो वह भी गायब हो जाती है |

इस साधना को करने के लिए सबसे पहले पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ अपना मुंह रखकर बैठ जाए आसन पर | आसन काला रंग का होना चाहिए | फिर अपने सामने मजोट के ऊपर पीले रंग का कपड़ा बिछा दे |  इस पर दत्तात्रेय भगवान का चित्र या महायंत्रको स्थापित कर दे | फिर पूजन करें पंचैपचार द्वारा | भोग में लड्डू लगाए बेसन का | एक  थाली में पानी भरे | थाली ताँबे की होनी चाहिए | इसमें एक दीपक लगा दें  | अब  रिद्धि सिद्धि अवधूत माला ले इसके द्वारा ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें | इस मंत्र का जाप पूरा होने के बाद पात्र से जल लेकर  घर में अथवा किसी पौधे में छिड़के | दिए को किसी  शिवालय में  रख दे जलाकर | आपमें गजब की शक्ति का संचार होगा |

 

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